माँग में सिन्दूर का महत्व [ औरतें इसे जरूर पढ़ें ]

हिन्दू धर्म एवं वैदिक परंपरा के अनुसार शादी के बाद सभी महिलाओ को मांग में सिंदूर भरना आवश्यक होता है। सिन्दूर हर सुहागन स्त्री के लिए बेहद ख़ास महत्त्व रखता है सिन्दूर सुहाग के लिए किये जाने वाले 16 श्रृंगारो में से एक है। जिसे हर सुहागन स्त्री को करना जरुरी होता है। सुहागन स्त्री के लिए सिन्दूर को सुहाग के प्रतीक के रूप में माना जाता है।

माँग में सिन्दूर का धार्मिक महत्व :-

यदि पत्नी के माँग के बीचो बीच सिन्दूर लगा हुआ है तो उसके पति की अकाल मृत्यू नही हो सकती है। जो स्त्री अपने माँग के सिन्दूर को बालो से छिपा लेती है उसका पति समाज मे छिप जाता है। जो स्त्री बीच माँग मे सिन्दूर न लगाकर किनारे की तरफ सिन्दूर लगाती है उसका पति उससे किनारा कर लेता है। यदि स्त्री के बीच माँग मे सिन्दूर भरा है तो उसके पति की आयु लम्बी होती है। रामायण मे एक प्रसंग आता है जब बालि और सुग्रीव के बीच युध्द हो रहा था तब श्रीराम ने बालि को नही मारा। जब बालि के हाथो मार खाकर सुग्रीव श्रीराम के पास पहुचे तो प्रभु श्रीराम जी ने कहा की तुम्हारी और बालि की शक्ल एक सी है इसिलिये मै भ्रमित हो गया, अब आप ही बताइये श्री राम के नजरो से भला कोई छुप सकता है क्या? असली बात तो यह थी जब श्रीराम ने यह देख लिया की बालि की पत्नी तारा का माँग सिन्दूर से भरा हुआ है तो उन्होने सिन्दूर का सम्मान करते हुये बालि को नही मारा ।
दूसरी बार जब सुग्रीव ने बालि को ललकारा तब तारा स्नान कर रही थी उसी समय भगवान ने देखा की मौका अच्छा है और बाण छोड दिया अब आप ही बताइये की जब माँग मे सिन्दूर भरा हो तो परमात्मा भी उसको नही मारते फिर उनके सिवाय कोई और क्या मारेगा।

माँग में सिन्दूर का महत्व: Image source: Wikimedia Commons

माँग में सिन्दूर का बैज्ञानिक महत्व :-

वैज्ञानिको की माने तो मांग में सिन्दूर भरने का संबंध स्त्री के पूर्ण शरीर से है विवाह के पश्चात सिन्दूर मस्तिष्क के मध्य में भरा जाता है वैज्ञानिको के अनुसार महिलाओ के मस्तिष्क के मध्य भाग में एक महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है जिसे ब्रहमरंध्र कहा जाता है। ब्रहमरंध्र ग्रंथि बेहद सहनशील ग्रंथि होती है ये ग्रंथि महिला के मस्तिष्क के अगर भाग से शुरू होकर मस्तिष्क के मध्य में खत्म होती है मस्तिष्क के इसी भाग में स्त्रियां सिन्दूर लगाती है इसीलिए ब्रहमरंध्र ग्रंथि के शुरूई शुरू से लेकर अंत तक सिन्दूर लगाया जाता है। सिन्दूर में पारा नाम की एक धातु पायी जाती है, जो ब्रहमरंध्र ग्रंथि के लिए बहुत ही प्रभावशाली धातु मानी जाती है माना जाता है पारा नामक यह धातु महिलाओं के मस्तिष्क के तनाव को कम करती है कहते है सिन्दूर में पायी जाने वाली इसी धातु के कारण महिलाओं का मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रहता है। वैज्ञानिक ये भी मानते है की जब लड़कियों का विवाह होता है तो उस पर कई तरह की जिम्मेदारियां और दायित्व आते है जिनका प्रभाव सीधा उनके मस्तिष्क पर पड़ता है जिसकी वजह से विवाह के बाद से ही महिलाओं में सर दर्द और अनिद्रा जैसे समस्याएं उत्पन्न होने लगती है सिन्दूर में मौजूद पारा एक तरल पदार्थ है जो मस्तिष्क के लिए बेहद फायदेमंद होता है इसीलिए विवाह के पश्चात हर महिला को सिन्दूर लगाना आवश्यक होता है। लेख़क का अनुरोध : आजकल फैसन चल रहा है सिन्दूर न लगाने की या हल्का लगाने की या बीच माँग में न लगाकर किनारे लगाने की ।

मैँ आशा करता हुँ की मेरे इस पोस्ट से आप लोग सिन्दूर का महत्व समझ गयी होंगी और अपने पति की लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिये अपने पति के नाम का सिन्दूर अपने माँग में भरे रहेगी।

1 Comment
  1. दुनिया वाले कयो LOVE करने वालो को
    निचे असतर से देखते हैं

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